Haunted : Savoy Hotel

पहाड़ों की रानी मसूरी में शाम जैसे-जैसे ढ़लती जाती है, अंधेरा दूरदूर तक फैली पहाडियों को अपने आगोश में ले लेता है। इसी अंधेरे में एक विरान होटल गुमनाम साए के रूप में करवट लेता है। हम बात कर रहे हैं मसूरी के प्रसिद्ध होटले में से एक रहे होटल सवॉय की। सवा सौ साल पुरानी यह इमारत आज मसूरी की तारीख का हिस्‍सा | मसूरी के बीचो-बीच स्थित इस होटल में एक साया बेचैन हो उठता है। होटल के कुल 121 कमरों में यह साया पूरी रात कुछ टटोलता रहता है।

150346079

होटल सवॉय के बारे में ये बातें यूं ही कही सुनी नहीं हैं। लोगों का मानना है कि इसका ताल्‍लुक हकीकत से है। आज का सवॉय दरअसल 19वीं शताब्‍दी का मसूरी स्‍कूल था जिसका नाम बाद में बदलकर मेडॉक स्‍कूल रख दिया गया। स्‍कूल की जर्जर हो चुकी इस इमारत को 1890 में इंग्‍लैंड से आए लिंकन ने खरीदा था। और फिर 12 साल की मेह‍नत के बाद वर्ष 1902 में इसे लंदन के मशहूर होटल सवॉय के तर्ज पर खड़ा किया। 121 कमरे, हिंदुस्‍तान का सबसे बड़ा बॉल रूम, आलिशान पार्क, गार्डन, टेनिस कोर्ट, रेसकोर्स और बिलयर्ड रूम यहां तक की होटल का अपना अलग पोस्‍ट ऑफिस अंग्रेजों के लिए एक ख्‍वाब के सच होने जैसा था।

haunted-savoy-hotel-in-mussoorie_1464259891

होटल में एक ब्रिटिश महिला का खून हो गया। अंग्रजों के बीच खलबली मची हुई थी। ऐसा इसलिए नहीं कि उस दौर में कत्‍ल नहीं होते थे बल्कि इसलिए क्‍योंकि कत्‍ल का तरीका बिल्‍कुल अलग था। लेडी गारनेट ऑरमे की लाश मौत के कई दिनों बाद होटल के कमरे से बरामद हुई थी। बावजूद इसके लाश एक दम ताजा मालूम पड़ रही थी। पुलिस की डायरी में यह हत्‍या दब गई और लोगों को पता भी नहीं चल पाया कि लेडी गारनेट ऑरमे की हत्‍या कैसे हुई थी।

इतना ही नहीं उनकी लाश का क्‍या हुआ यह भी रहस्‍य रह गया। कत्‍ल के बाद सवॉय की कहानी और पेंचीदा हो गई। लोगों को यकीन हो चुका था कि गारनेट ऑरमे का भूत होटल पर कब्‍जा कर चुका है। क्‍योंकि इस अजीबो गरीब मौत के बाद दो और लोगों (डॉक्‍टर जिसने ऑरमे की लाश का पोस्‍टमार्टम किया और एक पेंटर जो ऑरमे के लिए पेटिंग किया करता था) की रहस्‍यमय मौत हुई। एक पुरानी कहानी के मुताबिक सवॉय के मालिक ने इस इमारत को अपनी बीबी के दौलत से खरीदी थी। वो सिलसिलेवार कातिल था जिसने बाद में जायदाद की खातिर बीबी की भी हत्‍या कर दी। रहस्‍यमय मौतों के के बावजूद भी सवॉय की कशिश नए मालिकों को खीचती रही।

Hotel-Savoy-Mussoorie

इतिहास की मानें तो दूसरे विश्‍व युद्ध के वक्‍त सवॉय अमेरिका और ब्रिटीश फौजियों का ठिकाना था। यूं तो वारदात की शुरुआत हुई थी कत्‍ल से पर बात आगे बढ़ते बढ़ते पहुंच गई भटकती हुई रुहों पर और फिर खत्‍म हुई होटल की बर्बादी | आज यह होटल पूरी तरह बंद है। माना जाता है कि तब से ऑरमे की आत्‍मा इस होटल में अपने गुनहगार की तलाश कर रही है। इस स्थान को सीरियल किलिंग से भी जोड़कर देखा जाता है लेकिन अधिकांश लोगों का मानना है कि इन हत्याओं के पीछे उसी लेडी ऑरमे की रूह का हाथ है।

#rahulinvision

Advertisements

MDH Poster-man

MDH के सबसे प्रसिद्द चेहरे महाशय धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को सिआलकोट, पाकिस्तान में एक व्यापारी परिवार में हुआ था | भारत बटवारे के बाद ये भारत आ गए और अमृतसर शरणार्थी कैंप में रहने लगे | इसके बाद काम की तलाश में ये दिल्ली आ गए | इस बीच इन्होने तांगा चलने से लेकर सडको पर मसाला बेचने तक का काम किया |

1953 मे दिल्ली में इन्होने करोल बाग़ में मसालों की एक दूकान खोली | उसके बाद 1959 में चांदनी चौक में मसालों की दूसरी दूकान खोली | इन्होने कीर्ति नगर, नै दिल्ली में भूमि खरीदी जहा इन्होने मसालों के निर्माण के लिए फैक्ट्री लगे जिसका नाम Mahashian Di Hatti (MDH) रखा गया | इनके पिता महाशय चुन्नी लाल गुलाटी MDH के निर्माणकर्ता माने जाते है |

MDH-Masala

MDH मसालों में सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड है | महाशय धर्मपाल गुलाटी सबसे ज्यादा वेतन लेने वाले सीईओ है| लेकिन ये अपने वेतन का 90% अपने पिता के नाम से चलाये जाने वाले महाशय चुन्नी लाल चैरिटेबल ट्रस्ट को दे देते है जिसके द्वारा 250 बिस्तरों वाला हॉस्पिटल, मोबाइल हॉस्पिटल और 4 स्कूल गरीब बच्चो के लिए चलाये जाते है|

महाशय धर्मपाल गुलाटी सन 2019 में भारत के तीसरे नागरिक सम्मान ‘पदम् भूषण’ से सम्मानित किये जा चुके है |

#rahulinvision

vision with the purpose

%d bloggers like this: