550th Prakash Parv

गुरु नानक देवजी का प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। सिखों के पहले गुरु नानक देव जी की जयंती हर वर्ष की कार्तिक पूर्णिमा को देशभर में प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विशाल नगर कीर्तन निकाला जाता है। इस दौरान पंज (पांच) प्यारे नगर कीर्तन की अगुवाई करते हैं। श्री गुरुग्रंथ साहिब को फूलों की पालकी से सजे वाहन पर सुशोभित करके कीर्तन विभिन्न जगहों से होता हुआ गुरुद्वारे पहुंचता है। प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में प्रभातफेरी निकाली जाती है जिसमें भारी संख्या में संगतें भाग लेती हैं। प्रभातफेरी के दौरान कीर्तनी जत्थे कीर्तन कर संगत को निहाल करते हैं। इस अवसर पर गुरुद्वारे के सेवादार संगत को गुरु नानक देवजी के बताए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

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एक ओर जहां गुरुद्वारों में भव्य सजावट की जाती है, वहीं गुरु का प्रसाद लंगर भी बांटा जाता है। साथ ही गुरु नानक देव जी पर आधारित पोस्टर जारी किए जाते हैं। अपनी परंपरानुसार प्रभातफेरी में शामिल स्त्री-पुरुष सफेद वस्त्र एवं केसरिया चुन्नी धारण कर गुरुवाणी का गायन करते हुए चलते हैं। सभी जत्थों का जगह-जगह पर हार-फूल से स्वागत किया जाता है। शाम को दीवान सजाकर शबद कीर्तन का कार्यक्रम भी किया जाता है।

आएये जानते है श्री गुरु नानक देव जी के बारे में –

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल, 1469 में गाँव तलवंडी, शेइखुपुरा डिस्ट्रिक्ट में हुआ जो की लाहौर पाकिस्तान से 65KM पश्चिम में स्तिथ है। उनके पिता बाबा कालूचंद्र बेदी और माता त्रिपता नें उनका नाम नानक रखा। उनके पिता गाँव में स्थानीय राजस्व प्रशासन के अधिकारी थे। अपने बाल्य काल में श्री गुरु नानक जी नें कई प्रादेशिक भाषाएँ सिखा जैसे फारसी और अरबी। उनका विवाह वर्ष 1487 में हुआ और उनके दो पुत्र भी हुए एक वर्ष 1491 में और दूसरा 1496 में हुआ। वर्ष 1485 में अपने भैया और भाभी के कहने पर उन्होंने दौलत खान लोधी के स्टोर में अधिकारी के रूप में निकुक्ति ली जो की सुल्तानपुर में मुसलमानों का शासक था। वही पर उनकी मुलाकात एक मुस्लिम कवी के साथ हुई जिसका नाम था मिरासी।

गुरु नानक जी नें अपने मिशन की शुरुवात मरदाना के साथ मिल के किया। उन्होंने कमज़ोर लोगों के मदद के लिए ज़ोरदार प्रचार किया। उन्होंने अपने सिद्धांतो और नियमों के प्रचार के लिए अपने घर तक को छोड़ दिया और एक सन्यासी के रूप में रहने लगे। उन्होंने हिन्दू और मुस्लमान दोनों धर्मों के विचारों को सम्मिलित करके एक नए धर्म की स्थापना की जो बाद में सिख धर्म के नाम से जाना गया। भारत में अपने ज्ञान के प्रसार के लिए कई धर्म की जगहों का भ्रमण किया। पुरे भारत में अपने ज्ञान को बाँटने के पश्चात उन्होंने मक्का मदीना की भी यात्रा की और वहां भी लोग उनके विचारों और बातों से अत्यंत प्रभावित हुए। आखिर में अपनी 25 वर्ष की यात्रा के बाद श्री गुरु नानक देव जी करतारपुर, पंजाब के एक गाँव में किसान के रूप में रहने लगे और बाद में उनकी मृत्यु भी वही हुई।

श्री गुरु नानक देव जी से जुड़े कुछ मुख्या गुरूद्वारे –

1. गुरुद्वारा कंध साहिब- बटाला (गुरुदासपुर) –  गुरु नानक जी का यहाँ पत्नी सुलक्षणा से 18 वर्ष की आयु में संवत्‌ 1544 की 24वीं जेठ को विवाह हुआ था। यहाँ गुरु नानक की विवाह वर्षगाँठ पर प्रतिवर्ष उत्सव का आयोजन होता है।

 

2. गुरुद्वारा हाट साहिब- सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) गुरुनानक ने बहनोई जैराम के माध्यम से सुल्तानपुर के नवाब के यहाँ शाही भंडार के देखरेख की नौकरी प्रारंभ की। नवाब युवा नानक से काफी प्रभावित थे। यहीं से नानक को ‘तेरा’ शब्द के माध्यम से अपनी मंजिल का आभास हुआ था।

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3. गुरुद्वारा गुरु का बाग- सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) यह गुरु नानक देव जी का घर था, जहाँ उनके दो बेटों बाबा श्रीचंद और बाबा लक्ष्मीदास का जन्म हुआ था।

 

4. गुरुद्वारा कोठी साहिब- सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) नवाब दौलतखान लोधी ने हिसाब-किताब में ग़ड़बड़ी की आशंका में नानकदेवजी को जेल भिजवा दिया। लेकिन जब नवाब को अपनी गलती का पता चला तो उन्होंने नानकदेवजी को छोड़ कर माफी ही नहीं माँगी, बल्कि प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन गुरु नानक ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

 

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5.गुरुद्वारा बेर साहिब- सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) जब एक बार गुरु नानक अपने सखा मर्दाना के साथ वैन नदी के किनारे बैठे थे तो अचानक उन्होंने नदी में डुबकी लगा दी और तीन दिनों तक लापता हो गए, जहाँ पर कि उन्होंने ईश्वर से साक्षात्कार किया। सभी लोग उन्हें डूबा हुआ समझ रहे थे, लेकिन वे वापस लौटे तो उन्होंने कहा- एक ओंकार सतिनाम। गुरु नानक ने वहाँ एक बेर का बीज बोया, जो आज बहुत बड़ा वृक्ष बन चुका है।

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6. गुरुद्वारा अचल साहिब- अपनी यात्राओं के दौरान नानक देव जी यहाँ रुके और नाथपंथी योगियों के प्रमुख योगी भांगर नाथ के साथ उनका धार्मिक वाद-विवाद यहाँ पर हुआ। योगी सभी प्रकार से परास्त होने पर जादुई प्रदर्शन करने लगे। नानकदेवजी ने उन्हें ईश्वर तक प्रेम के माध्यम से ही पहुँचा जा सकता है, ऐसा बताया।

 

7. गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक- गुरुदासपुर जीवनभर धार्मिक यात्राओं के माध्यम से बहुत से लोगों को सिख धर्म का अनुयायी बनाने के बाद नानकदेवजी रावी नदी के तट पर स्थित अपने फार्म पर अपना डेरा जमाया और 70 वर्ष की साधना के पश्चात सन्‌ 1539 ई. में परम ज्योति में विलीन हुए |

 

एक बार फिर से आप सभी को प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाये |

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No Shave November – Movember

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No-Shave November is a web-based, non-profit organization devoted to growing cancer awareness and supportive funds which go towards preventing the disease, saving lives, funding research, educating, and aiding those fighting the battle. It is on the same lines as the Movember (Mustache+November) Movement, more information about which can be found here.

The story: (2009 के पतन में, रेबेका हिल और उसके दोस्त, ब्रेट रिंगडाहल ने ऐसे तरीकों का विचार किया कि कोई भी – चाहे वह उम्र, लिंग या आय का स्तर हो – कैंसर से लड़ने के लिए धन जुटा सकता है और इसे करने में मज़ा आ सकता है। नो शेव नवंबर एक स्पष्ट विकल्प था: लगभग हर कोई अपनी मेहनत की कमाई को संवारने में खर्च करता है, चाहे वह शेविंग, वैक्सिंग, ट्रिमिंग या थ्रेडिंग हो। यदि केवल नवंबर के लिए, उन व्यक्तियों ने उस लागत (कुछ डॉलर से लेकर $ 100 सैलून की यात्रा के लिए) को कैंसर दान के बदले दिया, तो दोस्तों और परिवार अकेले कैंसर रोगियों और उनके परिवारों की मदद के लिए परिवर्तन का एक बड़ा हिस्सा एकत्र कर सकते हैं। इसलिए, नो शेव नवंबर अपने पहले वर्ष में पचास प्रतिभागियों के साथ एक फेसबुक फैन-पेज के रूप में शुरू हुआ। संस्थापकों ने समझा कि कैंसर का व्यापक प्रभाव परिवारों, दोस्तों और पड़ोसियों पर पड़ा है। रेबेका के पिता, मैथ्यू, जिन्हें पहली बार 1996 में कैंसर का पता चला था और 2007 में उनका निधन हो गया, उनके समुदाय में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता था। उनकी सेवा की भावना में, सभी पहाड़ी भाई-बहन और उनके जीवन साथी – निक, मोनिका, आरोन, केटलिन, थेरेसा, क्रिस्टीन, एंड्रयू, एबे और थॉमस – अभियान के बढ़ने के साथ धन उगाहने के प्रयास में शामिल हो गए। नो शेव नवंबर ने वर्षों में सैकड़ों हजारों डॉलर जुटाए हैं। 2013 में, नो शेव नवंबर ने अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के साथ भागीदारी की, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वार्षिक अभियान में जुटाई गई धनराशि उन सभी क्षेत्रों में वितरित की जाएगी जो टीम के लिए मायने रखते हैं | हर मूंछ के बढ़ने और डॉलर के बढ़ने के साथ, नो शेव नवंबर बालों का जश्न मनाता है जो कई कैंसर रोगियों को खो देते हैं और बीमारी को मिटाने के लिए एक कदम और करीब पहुंच जाते हैं। )

In the Fall of 2009, Rebecca Hill and her friend, Bret Ringdahl, brainstormed ways that anyone – regardless of age, gender or income level – could raise money to fight cancer and have fun doing it.  No Shave November was an obvious choice: nearly everyone spends some amount of his or her hard-earned money on grooming, whether that’s shaving, waxing, trimming or threading.  If just for November, those individuals gave that cost (ranging from a few dollars for razors to a $100 salon visit) to a cancer charity instead, friends and family alone could pool together a sizable chunk of change to help cancer patients and their families.  So, No Shave November started as a Facebook fan-page with under fifty participants in its first year. The founders understood the wide impact cancer has on families, friends and neighbors.  Rebecca’s father, Matthew, who was first diagnosed with cancer in 1996 and passed away in 2007, was an avid contributor to his community.  In the spirit of his service, all of the Hill siblings and their spouses – Nick, Monica, Aaron, Caitlin, Theresa, Christine, Andrew, Abbey and Thomas – joined in the fundraising effort as the campaign grew.  Thanks to their various talents and the ever-sprouting legion of supporters, No Shave November has raised hundreds of thousands of dollars over the years. In 2013, No Shave November partnered with the American Cancer Society to ensure that the funds raised in the annual campaign would be distributed to all of the areas that matter to the team: research, prevention, education, and continuing care. With every whisker grown and dollar raised, No Shave November celebrates the hair that many cancer patients lose and gets one step closer to eradicating the disease.

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Health Benefits: There’s more to growing out your beard than just getting a new look. There’s actually health benefits, too!

  • A beard is a natural toxin filter — it keeps things like pollen and dust from getting into your lungs, because they’re clinging to your beard instead. 
  • It can also help prevent blemishes. Shaving gives you a risk of getting bacteria into your skin, especially if you’re not using proper methods. Growing out a beard can combat this.
  • November is when the weather really starts getting cold, and a beard can act like a scarf for your face and neck. It’s really the perfect time to stop shaving!
  • Lastly, a beard can help with sun protection. Obviously you will still need to apply sunscreen, because hair isn’t going to block out 100% of the sun’s UV rays, but it’s been proven that a beard can block up to 95% of them!

#rahulinvision

 

vision with the purpose

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