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क्वारंटाइन

आजकल आप कोरोना और कोविड-19 के साथ-साथ एक और शब्द बार-बार सुन रहें होंगे क्वारंटाइन। इस लेख में हम आपको क्वारंटाइन के बारे में सारी जानकारी दे रहे हैं। क्वारंटाइन, एकांतवास और आइसोलेशन के साथ ही मोदी सरकार द्वारा क्वारंटाइन के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, कहां-कितनी सुविधाएं दी रही हैं और पुरातन भारतीय सभ्यता से कैसे कोरोना को मात मिलेगी ये भी हम आपको बताएंगे।

क्वारंटाइन या क्वारंटीन का मूल क्वारंटीन या क्वारंटाइन लैटिन मूल का शब्द है, जो Quadraginta से आया है। इसका मूल अर्थ चालीस होता है। 16वीं सदी में ब्रिटेन के एक बड़े जहाजी बेड़े को उस शहर के किनारे नहीं रोका गया जहां पर संक्रामक बीमारी फैली थी। ब्रिटेन में प्लगे को रोकने के प्रयास के रूप में इस व्यवस्था की शुरुआत हुई थी। यहीं से अंग्रेजी में Quarantine शब्द मशहूर हुआ। भारत में ब्रिटिश इसी समय आए थे, लेकिन तब अंग्रेजों ने इसे इटैलियन Quarantena शब्द से लिया। इटली में ये शब्द फ्रांस के जरिए आया।

क्या है होम क्वारंटाइन ?होम क्वारंटाइन के बारे में जानना बेहद जरूरी है। कोरोना वायरस (Covid-19) से बचाव के लिए उन लोगों से खुद को ‘होमकर क्वारंटाइन’ करने को कहा जाता है, जिनमें वायरस होने का खतरा होता है। इसे होम क्वारंटाइन कहते हैं, यानी खुद को घर में सबसे अलग करके रखना। अगर आपको कोरोना वायरस से संक्रमित होने का संदेह है या फिर सर्दी-जुकाम लगा हुआ है तो आप एक कमरे में अपने आप को अलग कर लें। इससे आपके परिवार में किसी को वायरस नहीं फैलेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। मंत्रालय का कहना है कि घर पर अलग रहने का उद्देश्य संबंधित शख्स और अन्य लोगों की रक्षा करना है। खुद को साफ-सुथरे अलग कमरे में रखें, जिसमें बाथरूम भी हो। अगर कोई अन्य व्यक्ति भी उस कमरे में रहता है तो एक मीटर की दूरी बनाए रखें। घर में बुजुर्ग, गर्भवती महिला, बच्चों और बीमार व्यक्ति से दूर रहें। घर में इधर-उधर ना घूमें। किसी भी सामाजिक/धार्मिक कार्यक्रम में न जाएं। होम क्वारंटाइन की समयसीमा 14 दिनों की होती है।

क्वारंटाइन और आइसोलेशन में अंतर है – इन दोनों में बड़ा अंतर है। क्वारंटाइन ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिन्हें संक्रामक बीमारी से बचाना है। यानी वो संक्रामक बीमारी के चपेट में न आने पाएं। वहीं आइसोलेशन का इस्तेमाल उनके लिए किया जाता है, जिनका इलाज चल रहा हो या फिर वो बीमारी के संदिग्ध हैं।

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