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कैसे बनाए घर पर होली के रंग

होली का त्यौहार आते ही सबसे पहले मन मे जो बात आती है वो हे रंग की | बाजारों में होली के दौरान बहुत से रंग हानिकारक कैमिकल की मदद से जो बनाए जाते है| ऐसे में क्यों न इस बार होली पर रंग खेलने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें | तो चलिए जानते है घर पर प्राकृतिक रंग बनाने के आसान तरीके।

हरा रंग घर पर बनाने के लिए –

१ – हरे रंग के लिए मेंहदी का इस्तेमाल करें। मेंहदी को आटे के साथ मिलाकर आप सूखा हरा रंग तैयार कर सकते हैं।

२ -आप पालक, धनिया पत्ती, मेहँदी के पत्ते या नीम की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन्हे आप पीस कर ठन्डे पानी में मिलाकर हरा रंग तैयार कर सकते हैं।

पीला रंग घर पर बनाने के लिए –

सूखा पीला रंग:- हल्दी और बेसन को मिलाकर आप पीला रंग तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आप जितनी हल्दी लें, उसकी दोगुनी मात्रा में बेसन मिलाएं। आमतौर पर इसे बतौर उबटन भी घरों में इस्तेमाल करते हैं। यानी इस पीले रंग से त्वचा और भी निखर जाएगी।

गिला पीला रंग:- गीले रंग के लिए आप एक बड़ा चम्मच हल्दी को दो लीटर पानी में मिलाकर उबाल लें। इस घोल को थोड़ा गाढ़ा कर लेने पर यह बिल्कुल पक्का रंग हो जाएगा। चाहें तो गेंदे या अमलताश के फूल को पानी में उबालकर रात भर छोड़ दें और सुबह उससे होली खेलें।

लाल रंग घर पर बनाने के लिए –

सूखा लाल रंग :-

१ – लाल रंग के लिए आप लांल चंदन पाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लाल गुलाल की जगह आप चाहें तो लाल चंदन पाउडर में गुड़हल के फूल को सुखाकर व पीसकर मिलाएं। इससे गुलाल और भी लाल और खुशबूदार हो जाएगा।

२- लाल रंग का गुलाल बनाने के लिए जपाकुसुम या गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर आटे के साथ मिलाकर गुलाल बना सकते हैं।

३ -बीटरूट, अनार के छिलके, टमाटर या गाजर को पीसकर रस बना सकते हैं। और उसको पानी में घोलकर अच्छी तरह से नैचरल होली का लाल रंग बना सकते हैं।

गीला लाल रंग :- गीला रंग बनाने के लिए लाल चंदन पाउडर (दो चम्मच) को एक लीटर पानी में मिलाएं और खौला लें। इसमें अपनी जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर इससे होली खेलें। गाढ़े नारंगी लाल रंग के लिए एक चुटकी कत्था और दो चम्मच हल्दी पाउडर में कुछ बूंद पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे 10 लीटर पानी में घोलकर पतला कर लें।

गुलाबी रंग घर पर बनाने के लिए – इसके लिए आप चुकंदर का इस्तेमाल कर सकते हैं। चुकंदर बहुत हेअल्थी होता हैं। आप इसे कस ले और गर्म पानी में भिगो दे। अब इस पानी को छान ले। आपका गुलाबी रंग तैयार हो जाएगा। आप रंग बनाने के लिए फूलो का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे टेसू का फूल, गेंदे का फूल, गुलाब का फूल इत्यादि। आप इनको रात भर के लिए पानी में भिगो के छोड़ दे और इस पानी को छान ले। इससे आपको बहुत अच्छा रंग मिलेगा जो आपके चहेरे के लिए भी लाभदायक होगा।

नीला रंग घर पर बनाने के लिए –

सूखा नीला रंग:-

१ – नीला रंग बनाने के लिए आपको नीले गुड़हल के फूलों की जरुरत हैं। इसके लिए आपको इन फूलो को सुखा कर पीसने की जरुरत हैं। इससे आपको सूखा नीला रंग मिल जाएगा।

२- नीले रंग के लिए नील के पौधों पर निकलने वाली फलियों को पीस लें और पानी में उबालकर मिला लें।

गीला नीला रंग:-

१- नीले रंग के लिए नील के पौधों पर निकलने वाली फलियों को पीस लें और पानी में उबालकर मिला लें।

२- काले अंगूर को पीस कर उसमें पानी मिला ले। अगर आपअंगूर के पत्‍तों को पानी में उबाल ले तो वह भी नीला रंग देते हैं।

भूरा रंग घर पर बनाने के लिए – भूरा रंग बनाने के लिए आपको जरुरत हैं चाय की पत्ती की। इसके लिए आप ज़रूरत के अनुसार चाय की पत्ती को उबाल लें और उसको पानी में मिला ले आपको भूरा रंग मिल जाएगा|

काला रंग घर पर बनाने के लिए:- काले रंग के लिए अंगूर के बीज को निकालकर अच्छी तरह से पीस लें। फिर इसको पानी में अच्छी तरह से मिला लें। आपको काला रंग मिल जाएगा।

बैंगनी रंग घर पर बनाने के लिए:-

१ – बैंगनी रंग बनाने के लिए चुकंदर को बारीक काट कर रात भर पानी में भिगोकर रख दें। अगले दिन सुबह उबाल लें और छानकर इसका रस निकाल लें। इस रस को पानी में मिलाकर सुंदर बैंगनी रंग से होली खेलने का मजा उठा सकते हैं।

२ – जामुन के फल को पीसकर कर भी आप बैंगनी रंग बना सकते हैं।

नारंगी रंग घर पर बनाने के लिए –

सूखा नारंगी रंग:- नारंगी रंग का गुलाल बनाने के लिए पलाश के फूल का पावडर चंदन के पावडर में मिलाकर गुलाल भी बना सकते हैं।

गीला नारंगी रंग:- टेसू या पलाश के फूल को पीसकर पावडर बना लें और उसको पानी में घोलकर नारंगी रंग बना लें।

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लट्ठमार होली

भगवान कृष्ण की साथी राधा के जन्म स्थान बरसना की लट्ठमार होली भारत के सबसे रंगीन पर्व होली मनाने के अपने अनूठे तरीके के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यहाँ की होली में मुख्यतः नंदगाव के पुरूष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंदगाँव के थे और राधा बरसाने की थीं। नंदगाँव की टोलियाँ जब पिचकारियाँ लिए बरसाना पहुँचती हैं तो उनपर बरसाने की महिलाएँ खूब लाठियाँ बरसाती हैं। पुरुषों को इन लाठियों से बचना होता है और साथ ही महिलाओं को रंगों से भिगोना होता है। नंदगाँव और बरसाने के लोगों का विश्वास है कि होली का लाठियों से किसी को चोट नहीं लगती है। अगर चोट लगती भी है तो लोग घाव पर मिट्टी मलकर फ़िर शुरु हो जाते हैं। बरसाने की लट्ठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है | नंदगाव से आये पुरूषों को होरियारे कहा जाता है। बरसाना की लट्ठमार होली के बाद अगले दिन यानी फाल्गुन शुक्ला दशमी के दिन बरसाना के हुरियार नंदगांव की हुरियारिनों से होली खेलने उनके यहां पहुंचते हैं। तब नंदभवन में होली की खूब धूम मचती है।

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दरअसल बरसाना की लठामार होली भगवान कृष्ण के काल में उनके द्वारा की जाने वाली लीलाओं की पुनरावृत्ति जैसी है। माना जाता है कि कृष्ण अपने सखाओं के साथ इसी प्रकार कमर में फेंटा लगाए राधारानी तथा उनकी सखियों से होली खेलने पहुंच जाते थे तथा उनके साथ ठिठोली करते थे जिस पर राधारानी तथा उनकी सखियां ग्वाल वालों पर डंडे बरसाया करती थीं। ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी लाठी या ढ़ालों का प्रयोग किया करते थे जो धीरे-धीरे होली की परंपरा बन गया। उसी का परिणाम है कि आज भी इस परंपरा का निर्वहन उसी रूप में किया जाता है।

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जब नाचते झूमते लोग गांव में पहुंचते हैं तो औरतें हाथ में ली हुई लाठियों से उन्हें पीटना शुरू कर देती हैं और पुरुष खुद को बचाते भागते हैं। लेकिन खास बात यह है कि यह सब मारना पीटना हंसी खुशी के वातावरण में होता है। औरतें अपने गांवों के पुरूषों पर लाठियां नहीं बरसातीं. बाकी आसपास खड़े लोग बीच बीच में रंग बरसाते हुए दिखते हैं।

इस होली को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग बरसाना आते हैं। यह लट्ठमार होली आज भी बरसाना की औरतों / लड़कियों और नंदगांव के आदमियों / लड़कों के बीच खेली जाती है।

लट्ठमार होली का एक विडियो आएये देखते है –

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