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National Voters Day

वोट देना हर नागरिक का आधिकार है, क्योंकि देश के नागरिक के वोट से ही तय होता है कि आने वाली सरकार किसकी होगी | देशभर में आज ही के दिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस (National voters Day) मनाया जाता है | आइए जानते हैं भारत में मतदाताओं के लिए क्या नियम है –

सवाल: 18 साल की आयु योग्यता को निश्चित करने के लिए प्रासंगिक तारीख कौन सी है?

जवाब : लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 14 (ख) के अनुसार “अर्हता की तारीख” का अर्थ है उस साल के जनवरी माह का पहला दिन जिस साल में निर्वाचक नामावली अन्तिम रूप से प्रकाशित की जाती है |

सवाल: क्या ऐसा व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है मतदाता बन सकता है?

जवाब: नहीं. कोई व्यक्ति, जो भारत का नागरिक नहीं है, मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत नहीं हो सकता. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 के साथ पठित संविधान का अनुच्छेद 326 इस बिन्दु का स्पष्टीकरण करता है |

सवाल: क्या एक अनिवासी भारतीय नागरिक मतदाता बन सकता है?

जवाब : लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19 के अनुसार कोई व्यक्ति जो किसी निर्वाचन क्षेत्र का मामूली तौर पर निवासी है, उस निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत होने का हकदार होगा, तो भी ऐसे अनिवासी भारतीय नागरिक जो भारत सरकार के अधीन किसी पद पर भारत के बाहर नियुक्त हैं, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 20(3) के साथ पठित धारा 20(8)(घ) के अनुसार मतदाता के रूप में रजिस्ट्रीकृत होने के पात्र हैं |

सवाल: क्या कोई अपना नाम एक से अधिक स्थानों पर निर्वाचक नामावली में लिखा सकता है?

जवाब: नहीं. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 17 और 18 के प्रावधानों के अनुसार कोई व्यक्ति उसी निर्वाचन-क्षेत्र में एक से अधिक स्थानों में अथवा एक से अधिक निर्वाचन-क्षेत्र में रजिस्ट्रीकृत नहीं हो सकता |

सवाल: ऐसे नामों/अन्य विवरणों, जो निर्वाचक नामावली में सही प्रकार न लिखे गए हों, को ठीक कराने की क्या कार्य विधि है?

जवाब : निर्वाचक नामावलियों में संशोधन सम्मिलित कराने के लिए आपको फार्म-8 भरकर अपने विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण आफिसर के पास दाखिल करना होगा | मतदाता के रूप से रजिस्ट्रीकरण, संशोधन, पता आदि में परिवर्तन के लिए निम्नलिखित विभिन्न फार्म है:–

निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित कराने के लिए-  फार्म 6

निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किये जाने या हटाए जाने पर आक्षेप के लिए- फार्म 7

निर्वाचक नामावलियों में प्रवि‍ष्टियों के भूल सुधार के लिए- फार्म 8

निर्वाचक नामावली में प्रवि‍ष्टि को अन्यत्र रखने के लिए- फार्म 8

सवाल: संसदीय अथवा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने का जवाबदायित्व किसका है?

जवाब: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण ऑफिसर का दिल्ली के मामले में ये क्षेत्रीय उपप्रभागी मजिस्ट्रेट/अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी होते हैं | निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र की निर्वाचक नामावलियों की तैयारी का जवाबदायी होता है और यही उस संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र के लिए निर्वाचक नामावली होती है | जिससे वह विधान सभा खण्ड संबंधित है |

सवाल: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण आफिसर की नियुक्ति कौन करता है ?

जवाब: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13 ख के अधीन भारत निर्वाचन आयोग राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की सरकार के परामर्श से सरकार अथवा स्थानीय प्राधिकरण के किसी अधिकारी का निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण आफिसर के रूप में नियुक्त करता है. इसके अतिरिक्त भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण आफिसर की निर्वाचक नामावलियों की तैयारी/पुनरीक्षण के कार्यों में सहायता देने के लिए एक या अधिक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण आफिसर नियुक्त करता है |

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Navroz : Parsi New Year

पारसी धर्म का इतिहास और परंपरा :- 1380 ईस्वी पूर्व जब ईरान में धर्म परिवर्तन की लहर चली तो कई पारसियों ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया, लेकिन जिन्हें यह मंजूर नहीं था वे देश छोड़कर भारत आ गए। यहां आकर उन्होंने अपने धर्म के संस्कारों को आज तक सहेजे रखा है। सबसे खास बात ये कि समाज के लोग धर्म परिवर्तन के खिलाफ होते हैं।

पारसी समाज की लड़की किसी दूसरे धर्म में शादी कर लें तो उसे धर्म में रखा जा सकता है, लेकिन उनके पति और बच्चों को धर्म में शामिल नहीं किया जाता। ठीक इसी तरह लड़कों के साथ भी होता है। लड़का किसी दूसरे समुदाय में शादी करता है तो उसे और उसके बच्चों को धर्म से जुड़ने की छूट है, लेकिन उनकी पत्नी को नहीं। पारसी समुदाय धर्म परिवर्तन पर विश्वास नहीं रखते।

जिस प्रकार प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी का दिन नव वर्ष के रुप में मनाया जाता हैं. ऐसे ही हर साल पारसी नव वर्ष मनाया जाता हैं. इस दिन को पारसी समुदाय के लोग तथा इण्डिया के लोग बड़े ही उत्साह से मनाते हैं | ऐसा माना जाता कि 17 अगस्त के दिन ही तीन हजार वर्ष पहले इरान के जरथुस्त्र वंश के शासक शाह जमशेद ने सिंहासन ग्रहण किया था. शाह जमशेद ने ही पारसी कैलंडर का निर्माण किया था. जिसे “शहंशाही” के नाम से भी जाना जाता हैं | पारसी समुदाय के अनुसार इस दिन पूरी कायनात का निर्माण हुआ था. इस लिए भी इस दिन को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता हैं |

पारसी नव वर्ष कैसे मनाया जाता हैं – पारसी समुदाय का यह त्यौहार उनकी एकता का भी प्रतीक माना जाता हैं. इसलिए इस दिन पारसी लोग नव वर्ष मनाने के लिए अपने घर पर अपने रिश्तेदारों को, मित्रों को तथा आस – पडोस के लोगों को निमंत्रण देते हैं तथा उनके लिए खास तैयारियां करते हैं. अपने घर को फूलों से तथा अन्य वस्तुओं से सजाते हैं. घर के मुख्य द्वार के बीच विभिन्न रंग के रंगीन पाउडर से प्रकृति के मनमोहक चित्र बनांते हैं |इस दिन घर को अंदर और बाहर से अच्छी तरह सजाने के बाद घर के सभी व्यक्ति नए कपडे पहन कर तैयार होते हैं और अपने महमानों का गुलाब जल छिडक कर स्वागत करते हैं |

इस दिन लोग अपने घर में एक मेज रखकर उस पर जरथुस्त्र की तस्वीर, फूल, फल, चीनी, धूप, अगरबत्ती, शीशा, मोमबत्ती आदि पवित्र वस्तुएं रखते हैं | पारसी परम्परा में यह मान्यता हैं कि इस दिन इन सभी वस्तुओं को मेज पर रखने से घर के सदस्यों की आयु में तथा घर के सुख – सौभाग्य में वृद्धि होती हैं | पारसी समुदाय में इस दिन पुलाव, सेवई, मूंग दाल का हलवा आदि स्वादिष्ट भोजन बनाकर अपने मेहमानों को खिलाया जाता हैं |

मेहमानों को स्वादिष्ट भोजन कराने के बाद सभी लोग इकट्ठे होकर पूजा स्थलों पर जाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं. भगवान से प्रार्थना करने की यह विधि पारसी परम्परा के अनुसार “जश्न” कहलाती हैं |मंदिर से आने के बाद पारसी समुदाय के लोग गरीब लोगों को दान देते हैं. पारसी नव वर्ष में अग्नि देवता का भी विशेष महत्व हैं | इस दिन सभी लोग इकठे होकर आग जलाते हैं और उसमें चन्दन की लकड़ियों को डालकर अग्नि देवता का धन्वाद करते हैं तथा उनसे भी नव वर्ष को शुभ बनाने के लिए प्रार्थना करते हैं | अग्नि देवता से प्रार्थना करने के बाद सभी लोग एक दुसरे से मिलते हैं और उन्हें नव वर्ष की मुबारकबाद देते हैं |

नवराज़ या पारसी नया साल उन लोगों द्वारा मनाया जाता है जो ईरान, अफगानिस्तान, अज़रबैजान, जॉर्जिया, भारत, इराक, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, सीरिया, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान समेत देशों के निवासी हैं।

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