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बड़े काम के छिलके

प्राय: फलों का उपयोग करते समय उनके छिलकों को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है लेकिन छिलकों में कई चमत्कारिक गुण छिपे होते हैं | इन्हें कई रोगों को दूर करने के साथ-साथ सौंदर्य को निखारने में व अन्य प्रकार से उपयोग में लिया जा सकता है |

2017_2image_10_19_520676462lemonpeel-ll1] नीबू के छिलके : इनमें मौजूद अम्ल त्वचा की सफाई करता है व चमक और कोमलता को बढ़ाने में मदद करता है | इन्हें दाँतों पर मलने से दाँत चमकदार होते हैं और मसूड़े मजबूत बनते हैं | नींबू छिलकेसहित खाने पर कैंसर नहीं होता |

images.jpg2] संतरे के छिलके : इनको सुखाकर खूब महीन चूर्ण बना लें | इसे दाँतों पर घिसने से दाँत चमकदार बनते हैं | यह चूर्ण कच्चे दूध व हल्दी में मिलाकर चेहरे पर लगाने से मुँहासों व धब्बों का नाश होता है और त्वचा चमक उठती है | संतरे के छिलकों में रेशे होने के कारण ये कब्ज को दूर करने में मदद करते हैं |

images3] अनार के छिलके : अनार के सूखे छिलके बारीक पीस के रख लें | अधिक मासिक स्राव ने एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ लेने से रक्तस्त्राव कम होगा | इसमें दही मिला के गाढ़ा अवलेह (paste) बनाकर सिर पर मलने से बाल मुलायम होते हैं व रुसी से भी छुटकारा मिलता है | अनार का छिलका मुँह में डालकर चूसने से खाँसी में लाभ होता है | इसका चूर्ण नागकेसर के साथ लेने से बवासीर का रक्तस्त्राव बंद होता है |

images4] पपीते के छिलके : इन्हें छाया में सुखा के महीन चूर्ण बना लें | इसे ग्लिसरीन में मिला के चेहरे पर लगाने से त्वचा की रुक्षता दूर होती है |

images5] खीरे के छिलके : इनमें पाये जानेवाले अघुलनशील रेशे पाचनतंत्र के लिए अच्छे होते हैं तथा कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं | छिलकों को सुखाकर बनाये गये चूर्ण में नींबू की कुछ बूँदे मिला के अवलेह बना लें | इसे एलोवेरा जेल के साथ मिला के त्वचा पर लगायें | इससे त्वचा में निखार आता है | (एलोवेरा जेल सत्साहित्य सेवाकेन्द्रों एवं संत श्री आशारामजी आश्रम की समितियों के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध हैं |)

images6] आलू के छिलके : जलने पर आलू का छिलका लगाने से शीघ्र राहत मिलती है | आँखों के नीचे का कालापन हटाने हेतु ककड़ी की फाँक और आलू के छिलकों को बारी-बारी से कालिमावाले स्थान पर रगड़ें |

– शरीर का कोई अंग जल जाय तो जले हुए स्थान पर तुरंत कच्चे आलू का रस लगाना व उसके पतले टुकड़े (कटे चिप्स) रखना पर्याप्त है | इससे न फोड़ा होगा, न मवाद बनेगा, न ही मलहम या अन्य औषधियों की आवश्यकता होगी |

cats-85-620x4007] सेब के छिलके : इन छिलकों व इनके ठीक नीचेवाले गूदे में विटामिन ‘सी’ प्रचुर होता है | छिलकेयुक्त सेब को चबा-चबाकर खानेवाले को मसूड़ों से खून निकलने की बीमारी कभी नहीं होती | सेब के छिलके में विटामिन ‘ए’ गूदे की अपेक्षा 5 गुना अधिक होता है | अत: सेब का पूरा – पूरा लाभ उठाने के लिए चाकू आदि से उसके छिलके पर की जानेवाली मोम की पर्त उतारकर उसे छिलकेसहित खूब चबा-चबा के खायें |

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अनारकली : a hidden truth

आज भी हिंदुस्तान की मिट्टी में अनारकली को चुनवा देने की खुशबू बरकरार है | अनारकली को मुगल बादशाह अकबर और सलीम के बीच मनमुाव की वजह भी माना जाता है, मगर आजतक लोग अनारकली की जिंदगी के रहस्य को समझ नहीं सके | आमतौर पर लोगों को पता है कि अनारकली, सलीम से प्यार करती थी और वह अकबर की कनीज़ थी, मगर आपको बता दें कि अनारकली और सलीम के बीच एक और भी रिश्ता था जिसके बारे में आज हम आपको रुबरु करवाएंगे |

अकबर की पत्नी थी अनारकली – कई इतिहासकारों ने सलीम-अनारकली के संबंधों पर रिसर्च किया तो उन्होंने पाया कि अनारकली का असली नाम नादिरा बेगम था | उन्हें लोग शर्फुन्निसा भी कहते थे | नादिरा ईरान से लाहौर तक व्यापारियों की एक टोली के साथ आई थीं | नादिरा यानि अनारकली इतनी खूबसूरत थी कि जो भी उन्हे देखता था दीवाना बन जाता था | उनकी खूबसूरती की चर्चा पूरे लाहौर में थी | जब यह बात जलालुद्दीन अकबर को पता चली तो उन्होंने अपने दरबार में नादिरा को पेश होने का हुकुम दिया | नादिरा बेगम भी एक कनीज़ थी जो राजा के हुकुम को टाल नहीं सकती थी. इसलिए वह अकबर के दरबार में सफेद पोशाक पहनकर पेश हुईं | सफेद पोशाक में वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी | उनके गुलाबी गाल को देखकर अकबर ने उन्हे ‘अनारकली’ के नाम से नवाजा था और तब से नादिरा बेगम बन गई आनरकली | बादशाह अकबर को अपने पास नायाब चीजों को रखने में बहुत शौक था इसलिेए उन्होंने नादिर बेगम को अपनी बीवी बना लिया | उनके एक बेटा था दानियाल शाह | अकबर अपनी सभी पत्नियों में से अनारकली को सबसे ज्यादा चाहते थे |

सलीम-अनारकली के बीच संबंध था मां-बेटे का – वहीं ब्रिटिश टूरिस्ट फिंच ने 1611 में हिंदुस्तान का भ्रमण करते हुए अनारकली और सलीम के संबंधों को नाजायज़ बताया | उन्होने अपनी किताब में लिखा कि सलीम और अनारकली के बीच में मां-बेटे का संबंध था | मुगल बादशाह अकबर ने अनारकली से विवाह किया तब सलीम देश से बाहर थे, जब वह कई सालों बाद महल आए तो उनके स्वागत में अनारकली शामिल थी | सलीम ने पहली नज़र में आनरकली को देखा और उन्हें दिल दे बैठे | अनारकली भी सलीम की तरफ आकर्षित हो गई थी |

अनारकली और सलीम को एक-साथ देख लिया था – जब अनारकली-सलीम के बारे में अकबर को पता चला तो उन्होने अनारकली को सलीम से दूर रहने की चेतावनी दी | वहीं फिन्च के अनुसार, एक बार अकबर ने अपनी पत्नी नादिरा बेगम को पर्दे के पीछे से सलीम के साथ मुस्कुराता हुआ देख लिया था और उन्हें यकीन हो गया इस मामले में अनारकली भी दोषी हैं तो अकबर ने लाहौर के अपने महल की दीवार में नादिरा बेगम यानि अनारकली को चुनवा देने का आदेश दे डाला और अनारकली को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया था | वहीं कुछ इतिहासकारों का कहना है कि अकबर ने उन्हें पीछे के दरवाजे या सुरंग से बाहर निकाल दिया था |

पाकिस्तान में है अनारकली का मकबरा – अकबर के निधन के बाद उनके बेटे सलीम यानि जहांगीर ने राजगद्दी संभाली, लेकिन वह अपने पहले प्यार को कभी नहीं भुला पाएं| इसलिये जिस महल में अनारकली को चुनवाया गया था उसे अनारकली का मकबरा घोषित कर दिया गया | यह मकबरा आज पाकिस्तान के पंजाब सिविल सेक्रेटरिएट के पास स्थित है, जिसे अनारकली का मकबरा कहा जाता है |

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तो दोस्तों, इतिहासकारों के अनुसार ये थी सलीम-अनारकली की असली कहानी | जहांगीर की आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी में अनारकली का जिक्र कहीं नहीं हुआ है |

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